अध्यक्ष की कलम से

श्री नेलन प्रकाश तोपनो क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिज़र्व बैंक, बिहार और झारखंड अध्यक्ष, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना

मैंने हाल ही में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक) के पदेन सभापति का कार्यभार ग्रहण किया है। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना के बारे में जानकर अत्यंत खुशी हुई कि यह समिति नगर में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राजभाषा हिंदी का संबंध हमारी अस्मिता से है। हिंदी में काम करना केवल हमारा सांवैधानिक दायित्व ही नहीं है, बल्कि हमारे बैंकिंग कारोबार को एक नया विस्तार देने, इसे एक नया क्षितिज प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम भी है। भाषा मनुष्य के अस्तित्व को एक सर्जनात्मक स्वरूप प्रदान करती है। मनुष्य के व्यक्तित्व के निर्माण में भाषा, उसकी अभिव्यक्ति, उसकी वाणी और संवाद-कौशल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भाषा ही साक्षरता, शिक्षा, ज्ञान, सूचना और संप्रेषण सभी की आधारशिला होती है। हमारी भाषा, हमारी वाणी ही हमारे स्वप्नों को, हमारी कल्पनाओं को, हमारी सोच और हमारे चिंतन को स्वर प्रदान करती है। कोई भीवेबसाइट हमारी उसी अभिव्यक्ति को साकार करने में सहायता करती है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के इस युग में वेबसाइट हमारे संप्रेषण और संवाद का एक सशक्त माध्यम बन गयीहै। किसी भी वेबसाइट का महत्व तब और बढ़ जाता है जब उसमें सुदृढ़ तकनीकी पक्ष और सूचनात्मक तथ्यपरकता के साथ ही सर्जनात्मकता का स्पर्श भी हो।

बैंक की कार्यालयीन, औपचारिक और व्यावसायिक कार्य संस्कृति में काम करते हुए हम बैंककर्मियों को अपनी रचनाशीलता बनाए रखना, स्वयं को व्यक्त करने की सर्जनात्मकता को बनाए रखना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना की अपनी इस वेबसाइट के माध्यम से हमने इस चुनौती को एक रचनात्मक स्वरूप देने की कोशिश की है। इस वेबसाइट को सूचनात्मक स्वरूप देते हुए भी इसे साहित्यिक-सांस्कृतिक दृष्टि से सर्जनात्मक बनाए रखने की पूरी कोशिश की गयी है।

यह वेबसाइट हमारे लिए केवल एक वेबसाइट ही नहीं है बल्कियह हमारी सोच, हमारे विचार, हमारे चिंतन, हमारी कल्पना, हमारी सर्जना और हमारे परिवेश का एक आईना भी है।आपसे अपनी बात कहने, आपके द्वारा व्यक्त विचार, सुझाव, अभिमत सुनने –पढ़ने, आपसे एक सार्थक संवाद स्थापित कर पाने का एक माध्यम है, एक रचनात्मक मंच है।

अंत में आप सभी से अनुरोध करना चाहूँगा कि आइये हम सब मिलकर नराकास, पटना के माध्यम से राजभाषा हिंदी को और अधिक ऊँचाइयों पर ले जाएँ।