अध्यक्ष की कलम से

श्री देवेश लाल, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिज़र्व बैंक, पटना एवं अध्यक्ष नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना

मैंने नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक) के पदेन अध्यक्ष का कार्यभार 02 सितंबर 2019 को ग्रहण किया है। मुझे नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना के बारे में यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि यह समिति नगर में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और समिति को वर्ष 2018-19 के लिए राजभाषा कीर्ति पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह सम्मान हमें एक नई जिम्मेदारी का अहसास कराता है कि हम निरंतर बेहतर कार्यनिष्पादन करते रहें।

समिति सभी सदस्य बैंकों में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। राजभाषा हिंदी में काम करना केवल हमारा सांवैधानिक दायित्व ही नहीं है, बल्कि बैंकिंग कारोबार को एक नया विस्तार देने, इसे एक नया क्षितिज प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम भी है। इस दृष्टि से नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना सदस्य बैंकों के लिए एक ऐसा सशक्त और सक्रिय मंच उपलब्ध कराती है जहाँ हम राजभाषा नीति के सफल कार्यान्वयन और राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग की दिशा में उत्कृष्ट कार्यनिष्पादन के लिए विचार विमर्श करने, एक दूसरे के अनुभवों को परस्पर बाँटने और सार्थक संवाद करने की सुविधा उपलब्ध हो पाती है।

सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में वेबसाइट हमारे संप्रेषण और संवाद का एक सशक्त माध्यम बन गयी है। किसी भी वेबसाइट का महत्व तब और बढ़ जाता है जब उसमें सुदृढ़ तकनीकी पक्ष और सूचनात्मक तथ्यपरकता के साथ ही सर्जनात्मकता का स्पर्श भी हो। इस दिशा में समिति की वेबसाइट मील का पत्थर है। हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हमेशा यह सुनिश्चित किया जाए कि राजभाषा संबंधी आंकड़े और सूचनाएं तथ्यपरक हों।

बैंक की औपचारिक और व्यावसायिक कार्य संस्कृति में काम करते हुए हमें अपनी रचनाशीलता बनाए रखना, स्वयं को व्यक्त करने की सर्जनात्मकता को बनाए रखना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक), पटना की अपनी इस वेबसाइट के माध्यम से हमने इस चुनौती को एक रचनात्मक स्वरूप देने की कोशिश की है। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई है कि इस वेबसाइट को सूचनात्मक स्वरूप देते हुए भी इसे साहित्यिकसांस्कृतिक दृष्टि से सर्जनात्मक बनाए रखने की पूरी कोशिश की गयी है।

आप सभी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि, आइये हम सब मिलकर नराकास के माध्यम से राजभाषा हिंदी को और अधिक ऊँचाइयों पर ले जाएँ।